आगरा। उत्तराखण्ड की कुलदेवी माँ नन्दा देवी की लोक जात यात्रा का आगरा पहुंचने पर उत्तराखण्डी प्रवासी कल्याण समिति (रजि.), आवास विकास कॉलोनी की ओर से स्वागत किया गया। इस अवसर पर 12 सितंबर 2026 को दत्त सत्संग भवन, सिकन्दरा में कलश यात्रा एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
माँ नन्दा देवी की लोक जात यात्रा उत्तराखण्ड की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यह यात्रा उत्तराखण्ड के चमोली जिले के नोटी ग्राम से प्रारंभ होती है। यात्रा को माता उमा यानी पार्वती को उनके मायके से भगवान शिवशंकर के निवास कैलाश पर्वत के लिए विदा करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
उत्तराखण्ड की संस्कृति को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने और प्रवासी उत्तराखण्डी समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से यह यात्रा विभिन्न शहरों से होकर गुजरती है। यात्रा का मार्ग मुम्बई, वसई, बड़ौदा, जोधपुर, पुष्कर, जयपुर, आगरा एवं चण्डीगढ़ होते हुए उत्तराखण्ड के कड़को ग्राम तक बताया गया है।
कड़को ग्राम में पूजा-अर्चना के बाद माता की विधिवत आराधना की जाती है। इसके बाद माता लगभग छह माह के लिए अपने ननिहाल में विराजमान रहती हैं। इस धार्मिक यात्रा का नेतृत्व महंत श्री धनी प्रसाद देवराडी कर रहे हैं।
आगरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तराखण्डी समाज के लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ माँ नन्दा देवी का स्वागत किया। कलश यात्रा में महिलाओं सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और धार्मिक वातावरण में माता की पूजा-अर्चना की।
कार्यक्रम में समिति से जुड़े रघुनन्दन चमोली, विजय रावत, तेज सिंह, लक्ष्मण सिंह, संदीप देवरानी, शैलेन्द्र, सुनील, राकेश, शिव सिंह, जगत सिंह, पूरण, राम सिंह, दिनेश मनराल सहित अन्य मातृशक्ति एवं समाज के लोग मौजूद रहे।
आयोजकों ने कहा कि माँ नन्दा देवी की लोक जात यात्रा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी यात्रा नहीं है, बल्कि यह उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को आगे बढ़
