शिक्षा की सबसे बड़ी कुर्सी... और उस पर अब बैठे हैं प्रह्लाद जोशी.....


 देहात न्यूज टुडे/ डेस्क / धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार ने एक ऐसा चेहरा आगे किया है, जो दिल्ली की सियासत में नया नहीं, बल्कि पुराना खिलाड़ी माना जाता है। पांच बार सांसद... कई बड़े मंत्रालयों का अनुभव... और अब करोड़ों छात्रों की उम्मीदों का बोझ भी इन्हीं के कंधों पर आ गया है।  

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छिड़ा महासंग्राम अब समाप्त होगया है,  लेकिन सवाल वही है... आखिर कौन हैं प्रह्लाद जोशी? क्या ये सिर्फ कुर्सी बदलने की कहानी है या फिर शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है?

चलिए... पूरी कहानी शुरू से जानते हैं।

कर्नाटक के बीजापुर में 27 नवंबर 1962 को एक साधारण रेलवे कर्मचारी के घर जन्मे प्रह्लाद जोशी की शुरुआत किसी राजनीतिक खानदान से नहीं हुई। आम परिवार... आम जिंदगी... लेकिन सोच बड़ी। पढ़ाई पूरी की और फिर कदम बढ़े आरएसएस की तरफ। यहीं से संगठन की पाठशाला शुरू हुई और फिर राजनीति की पिच पर उनकी असली एंट्री हुई।

90 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान आंदोलन ने उन्हें पहली बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद भाजपा ने जिम्मेदारियां बढ़ाईं और साल 2004 में जनता ने पहली बार उन्हें लोकसभा भेज दिया। फिर ऐसा सिलसिला चला कि 2009... 2014... 2019... और 2024... हर चुनाव में जनता ने उन पर मुहर लगा दी। लगातार पांच बार सांसद बनना बताता है कि राजनीति की बिसात पर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। 

दिल्ली दरबार में भी उनका कद लगातार बढ़ता गया। कभी संसद का पूरा हिसाब-किताब संभाला... कभी कोयला मंत्रालय... कभी खान मंत्रालय... फिर उपभोक्ता मामले और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे बड़े विभाग। अब सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय की कमान भी सौंप दी है। मतलब साफ है... भरोसा बड़ा है और जिम्मेदारी उससे भी बड़ी। 

लेकिन इस बार मामला सिर्फ मंत्रालय चलाने का नहीं है। इस बार दांव पर करोड़ों छात्रों का भरोसा है। पेपर लीक के आरोपों से घिरी शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं पर उठते सवाल और नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने की चुनौती... यही वो असली इम्तिहान है, जिसमें अब प्रह्लाद जोशी को नंबर लाने हैं। 

कुर्सी मिल चुकी है... अब बारी है काम दिखाने की।

देश देख रहा है... छात्र इंतजार कर रहे हैं... और शिक्षा मंत्रालय की हर अगली चाल पर अब पूरे देश की नजर रहने वाली है।

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