आगरा।_रुकें कुल्हाड़ी, बढ़े हरियाली, तभी जीवन में आए खुशहाली_ - इसी संदेश के साथ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) आगरा इकाई ने माथुर वैश्य सभा भवन में नाटक ‘रामी’ की दमदार प्रस्तुति दी। यह नाटक जोधपुर के प्रसिद्ध लेखक सत्यनारायण जी की कहानी पर आधारित था, जिसका नाट्य रूपांतरण और निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी दिलीप रघुवंशी ने किया है।
क्या है ‘रामी’ की कहानी?
नाटक की मुख्य पात्र रामी एक बंजारन बच्ची है, जिसे प्रकृति से बेहद लगाव है। बरगद के विशाल पेड़ से लेकर कैर की झाड़ी और कुएं तक, वह हर प्राकृतिक नजारे में खोई रहती है। इसी दौरान इलाके में तबादले पर आए एक परिवार के बच्चे सत्या से उसकी दोस्ती हो जाती है। रामी सत्या को प्रकृति की खूबसूरती से रूबरू कराती है। कुछ समय बाद सत्या के पिता का फिर तबादला हो जाता है और दोनों बचपन के दोस्त बिछड़ जाते हैं।
बीस साल बाद जब सत्या वापस लौटता है तो सब कुछ बदला हुआ पाता है। औद्योगीकरण और शहरीकरण ने उस हरे-भरे इलाके को उजाड़ दिया है। पता चलता है कि प्रकृति को बचाने की जद्दोजहद में रामी ने अपने प्राण तक दे दिए। इस मार्मिक अंत के जरिए नाटक पर्यावरण बचाने का बड़ा संदेश देता है।
कहानीकार खुद जोधपुर से पहुंचे आगरा
इस खास मौके पर कहानीकार सत्यनारायण जी स्वयं जोधपुर से आगरा पधारे। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. ज्योत्सना रघुवंशी ने इप्टा के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1942 में बंगाल अकाल के दौरान राजेंद्र रघुवंशी और बिशन खन्ना ने एक कल्चरल स्क्वायड की स्थापना की थी, जिसने गीतों और नाटकों के जरिए जनजागरूकता फैलाई। 1943 में इप्टा की विधिवत स्थापना हुई। 1985 में राजेंद्र रघुवंशी ने इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन के जरिए संगठन में नई ऊर्जा भरी।
कार्यक्रम में संयोजक नीरज मिश्रा ने कहानीकार का माल्यार्पण कर स्वागत किया, जबकि इप्टा अध्यक्ष सुबोध गोयल ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ से आए साहित्यकार जय प्रकाश का स्वागत शकील चौहान ने किया।
कलाकारों ने बांधा समां
रामी की भूमिका में निवेदिता और सत्या की भूमिका में रविंदर ने शानदार अभिनय किया। सूत्रधार के रूप में असलम खान, लेखक के किरदार में जय कुमार, ग्रामीण के रूप में पार्थो घोष और सत्या की मां की भूमिका में पूजा पाराशर ने अपने किरदारों में जान फूंक दी। पार्श्व स्वर कुमकुम रघुवंशी का रहा। संगीत संयोजन सिद्धार्थ रघुवंशी, संगीत संचालन परमानंद शर्मा, नृत्य संयोजन पूजा शर्मा और लाइटिंग व्यवस्था बब्बू ने संभाली। मंच प्रबंधन शकील चौहान और शैलेंद्र शर्मा ने देखा, जबकि मुख्य सहयोग कुमकुम रघुवंशी और मुक्ति किंकर का रहा। रिकॉर्डिंग इमामुद्दीन और रूपसज्जा आनंद बंसल की रही। अंत में क्रांतिकारी रोशन लाल सुतेल स्मृति समिति ने सभी कलाकारों को पुरस्कृत किया और आभार व्यक्त किया इप्टा अध्यक्ष सुबोध गोयल ने। इस अवसर पर डॉ. शशि तिवारी, अनिल शुक्ला, प्रियंका मिश्रा, अनिल जैन, धर्मजीत सिंह सहित शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
